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पत्रकार नईम क़ुरैशी - शिक्षा के क्षेत्र में समाज सेवा

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शिक्षा के क्षेत्र में समाज सेवा गुडलक चिल्ड्रन स्कूल के डायरेक्टर मों. अन्सार खान विगत 27 वर्षों से षिक्षा क्षेत्र से जुड़े है। उन्होंने कठोर परिश्रम, योग्यता, बुद्धिमता तथा दूरदर्षिता से विद्यालय को उच्च स्तर पर पहुंचाया। इसी का परिणाम है कि आज दोनों विद्यालयों ने कच्ची बस्तीयों की हर झोपड़ पट्टी को षिक्षा से रोषन किया है। इस का श्रेह मों. अन्सार खान के बड़े भाई मों. अतीक साहब को जाता है।   जीवनी: मों. अन्सार खान का जन्म नवाबों की नगरी टोंक में 1977 को हुआ। तथा उन्होंने ग्रेजुएषन सन् 1999 में राजस्थान यूनिवर्सिटी से की तथा बी.एड भोंपाल बरकातुल्लाह विष्व विद्यालय, माध्यप्रदेष से सन् 2008 में की। विद्यालय की षुरूआत कब और कैसे हुई? मेरे वालिद मों. षफीक साहब ने 10 वर्ष तक मस्जिद में इमामत की है। उनके ही विचारों व आदर्षो से इस विद्यालय को षुरू किया। हमारे वालिद ने ही हम दोनों भाईयों को विद्यालय की जमीन खरीद कर दी। आमागढ़ षक्ति काॅलोनी में 1989 में गुडलक पब्लिक स्कूल षुरू किया वर्तमान में जिसमें 716 बच्चे है। तथा आजाद नगर में 1996 से गुडलक चिल्ड्रन स्कूल चल रहा है जिसमें वर्त...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - राजस्थान की आवाज शराब मुक्त राजस्थान

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        राजस्थान की आवाज शराब मुक्त राजस्थान शराब  हमेशा से मानव समाज के लिए एक अभिषाप रही है। इसके सेवन से अनगिनत लोगों की मौत होती होती रही है इसका सेवन दुनिया के लाखों लोगों के लिए दुःख और परेषानी का कारण बनता है। षराब मानव समाज को पेष आने वाली विभिन्न कठिनाइयों का दुनियावी सबब रही है। अपराधों की दर में जिस तरह दिन-प्रतिदिन अभिवृद्धि हो रही है, लोगों की मानसिक रोगों की घटनाओं में बढ़ोŸारी हो रही है, विकल चलाते समय दुर्घटनाएँ होती हैं तथा लाखों लोगों के परिवारिक जीवन छिन्न-भिन्न हो रहे हैं, अनगिनत अपराध होते है, इन सबके पीछे षराब की ख़मोष विध्वंसकारी षक्ति कार्य कर रही है। शराब की लत में युवा पीढ़ी इसकी गिरफ्त में तेज़ी से आ रही है। षोधकर्ताओं के अनुसार षराब के ज्यादा सेवन से 200 बीमारियों का खतरा है। षराब के सेवन आपकी प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है और इसके चलते न्यूमोनिया और टीबी जैसी अनेक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सरकार को इस ओर विचार करने की जरूरत है। राजस्थान में षराबबंदी को लेकर कई संगठन आंदोलन चला रहे है, जनता में इसको लेकर रोष...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - इंसानियत की मिसाल है। डाॅ ललित कुमार बाँगा

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इंसानियत की मिसाल है। डाॅ ललित कुमार बाँगा   डाॅ ललित कुमार बाँगा अपने इस व्यस्त जीवन में भी वह अपने दैनिक कार्यों को पूरे अनुशासनात्मक ढंग से पूरा करते हैं। सच बोलना और ईमानदारी की राह पर चलने को भी वह सफलता का सबसे बड़ा मंत्र मानते हैं। व अपने जीवन में खान-पान में संयम, अनुशासनात्मक जीवन तथा खुश रहना तथा दूसरों को खुश रखना ही उनके जीवन का मूल मंत्र हैं। इसके साथ ही व अपने इष्वर को भी कभी नही भूलते व कहते है कि में उस इष्वर को जब याद करता हूँ तो मन भावूक हो जाता है क्यूकि उसने मुझे औकात से ज्यादा दिया है। और मेरी प्रेरणा भी वही है, तो रखवाला भी वही है, में उसकी छत्रछाया में हूँ तो सिक्योर हूँ, वो मेरा सब कुछ है। वो मुझे मेरी ओकात रोज याद दिलाता है। और मेरी औकात भी इतनी है कि मुझे एक दिन एक थेली में ले जाकर गंगा में बहा दिया जायेगा। और दिवारों पर लिखे नाम ये बिल्डिंगे सब मिट जायेंगे। बस कर्म ही एक ऐसी चीज है जिसकी सुगंध रह जायेगी। यह उक्त विचार डाॅ ललित कुमार बाँगा के है।  परिचय: डाॅ ललित कुमार बाँगा का जन्म सन् 1968 को अलवर में हुआ। पढ़ाई उन्होंने जयपुर में ही पूरी...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - कठिनाइयों से मिली सफलता

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कठिनाइयों से मिली सफलता  देश व दुनिया में अपनी पहचान रखने वाली साड़ी व्यवसाय में कोलकाता , बनारस , सूरत की तरह ही जयपुरी साड़ीयो की भी अपनी ही पहचान हैं इसी व्यापार से जुड़े हुए जयपुर कपड़ा व्यापारी साड़ी व्यापार में सबसे कम उम्र के कामयाब व्याक्तियों में शुमार SS TRADELINK (a unit of teÛtile agency) के डायरेक्टर श्री पवन गणपती गौड़ का जीवन संघर्ष, मेहनत, सफलता और कार्यक्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य की मिसाल है। बचपन से ही संघर्ष के पथ पर आगे बढ़ सफलता हासिल करने वाले पवन गणपती गौड़ का मानना है कि कठिनाइयां जिंदगी के साथ आती है और बिना किसी कठिनाई के जीवन में कुछ पाना व्यर्थ  हैं, व जीवन ही संघर्ष हैं और सच्ची सफलता कठिनाइयों से गुजरते हुवे ही मिलती है। आपने पिता को ही प्रेरणा मानने वाले पवन गणपती गौड जी का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। आगे उनके विचार और सफलता की जीवनी उन्हीं के शब्दों  में-   मेरा जन्म 1984 को जयपुर शहर  में हुआ। परिवार में माता पिता व हम 4 बहन भाई थे  परिवार में सिर्फ पिता ही कामाने वाले एकमात्र व्यक्त...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - पद के साथ आती हैं बड़ी जिम्मेदारियां

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  पद के साथ आती हैं बड़ी जिम्मेदारियां नारियों में अपरिमित शक्ति और क्षमताएँ विद्यमान हैं। व्यवाहरिक जगत के सभी क्षेत्रों में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किये हैं। शारदा साध भी उन्ही महिलाओं में से एक है जिन्होंने अपने अदभुत साहस, अथक परिश्रम तथा दूरदर्षी बुद्धिमत्ता के आधार पर राजस्थान में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं। परिचय: शारदा साध का जन्म 1982 को जयपुर में हुआ। तथा उन्होंने रविन्द्र बाल भारती स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की तथा ग्रेजुएषन राजस्थान यूनीवर्सीटी से किया। और सन् 2003 में एम.ए, व उसके बाद बी.एड, तथा एलएलबी 2013 में कमप्लीट की। सन् 2009 में उनका विवाह हंसराज साध के साथ हुआ। आज उनका एक पुत्र भी है जिसका नाम यषराज साध है जो की चार वर्ष का हो चुका है। पिता से मिली प्रेरणा: शारदा साध बताती है कि उनके पिता श्री हरीनारायण बैरवा पूर्व में ट्रास्पोर्ट डिपार्टमेंट में एडिसनल कमिषनर रहे। तथा वर्तमान में बैरवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। पिता जी से ही प्रेरणा मिली है। उनसे ही लोगों के काम करके आगे बढ़ना सीखा है। वर्तमान स्थिति: शारदा साध कृषि उपज मण्डी समिति की चैयरमै...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - हज़ारों कलाकारों का मुकद्दर संवारा है रविन्द्र मंच ने

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हज़ारों कलाकारों का मुकद्दर संवारा है रविन्द्र मंच ने जयपुर को ’सिटी आॅफ आर्ट्स’ भी कहा जाता है। वास्तव में जयपुर समृद्ध कलाओं का शहर है। कला की कद्र राजसी परंपरा आज भी कायम है। और विभिन्न कलाओं को पनाह देकर सिर आखों पर बिठाने का मुकाम है-रविन्द्र मंच। इसी मंच से हजारो कलाकार ने अपनी लाईफ बदली है। ये वही रविन्द्र मंच है जहां से अनेक कलाकारों ने अपनी कला के जरीए देष-विदेष में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है। इसी रविन्द्र मंच से अपने जीवन की षुरूआत डाॅ. चन्द्रदीप हाड़ा ने सन् 1992 से तथा उनकी पत्नी मोनिका सिंह सन् 1996 से की है। डाॅ. चन्द्रदीप हाड़ा को भारत के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में शोध करने के लिए प्रदान की जाने वाली जूनियर फेलोशिप प्रदान की गयी है। डाॅ. चन्द्रदीप हाड़ा तथा उनकी पत्नी मोनिका सिंह ने गल्र्स चाइल्ड, भ्रुर्ण हत्या तथा पर्यावरण जैसे अनेक इषूज पर नाटकों का मंचन कर किया है। और जयपुर के प्रमुख स्थानों पर वर्कषाॅप चला रहे है। परिचय: डाॅ. चन्द्रदीप हाड़ा का जन्म 1972 को जयपुर में हुआ तथा उन्होंने पीएचडी डोमेस्टिक आर्ट मे राजस्थान विष्व विद्यालय से किया...

पत्रकार नईम क़ुरैशी - जैकपोर्ट से मिली लोकप्रियता

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जैकपोर्ट से मिली लोकप्रियता   मंजूर अली कुरैषी का कहना है कि फिल्म लाइन उनका ड्रीम था, उनका जो सपना था वो उन्होंने पूरा किया। उन्होंने बताया कि लोग उनको देखकर हंसते थे उनके उपर जूमले छोड़ते, कि देखो वो जा रहा है हीरो लेकिन उन्होंने उनका कभी जवाब नही दिया। क्यूकि वक्त बड़ा बलवान होता है, उस वक्त वो कुछ नही थे। उस वक्त उनके लब पर एक ही षेयर हुवा करता था। ”अभी सूरज डूबा नही जरा षाम तो होने दो, में खुद लोट आऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो, जमाना ढूँढता है मुझको बदनाम करने का बहाना में खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो“   लेकिन कुछ समय बाद जब उनकी फिल्म बापू जी ने चाहे बिंदणी, सिल्वर जुबली गई और राजस्थान के 50 से अधिक सिनेमा घरों में चली, और गलियों में रोड पर हर जगह उनके पोस्टर लगे तो लोगों के मूह पर ताला लग गया। जीवन परिचय: मंजूर अली कुरैषी का जन्म 1972 को जयपुर में हुआ। तथा एजुकेषन एम.ए आर्ट कल्चर। एम बी इंटरटेन्मेंट के डायरेक्टर है व आशा दर्षन कला संस्थान से जुड़े तथा कला संस्कृतिक प्रकोष्ठ कांग्रेस प्रदेष सचिव है। थिएटर से षुरूआत: मंजूर अली कुरैषी ने 19 साल की उमर...