पत्रकार नईम क़ुरैशी - शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करना मेरा उद्देश्य सैयद जर्रार अहमद

शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करना मेरा उद्देश्य सैयद जर्रार अहमद

 ब्राइट कैरियर स्कूल की स्थापना शिक्षाविद् स्व. मास्टर सैयद शराफत अली साहब द्वारा सन् 1993 में की गई थी। और सन् 1995 में इस विद्यालय की जिम्मेदारी वे अपने नवासे सैयद जर्रार अहमद नकवी पर डालने की सोच रहे थे। लेकिन उस समय सैयद जर्रार अहमद नकवी को रेलवे में टीसी की नोकरी जोईन करनी थी और वो अपने नाना को अपना आदर्श मानते थे और इस ही लिए उन्होंने रेलवे की नोकरी को ठुकराते हुए ब्राइट कैरियर स्कूल की जिम्मेदारी ली। 

मास्टर सैयद शराफत अली साहब की दूरदर्शिता एवं परिश्रम से विद्यालय की स्थापना इस उद्देष्य से की थी कि गरीब, प्रतिभाशाली एवं शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित किया जाए। राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे के सैयद खानदान में 1 जुलाई 1972 जन्में जर्रार अहमद ने अपनी योग्यता, बुद्धिमता व दूरदर्शिता से विद्यालय को उच्च स्तर पर पहुंचाया। जिसकी परमाणित्ता ये है की सन् 2001 में मुस्लिम कंवेशन हुआ जिसमें 4 वर्ष का बोर्ड रिजल्ट के आधार पर 119 स्कूल में सबसे अच्छा रिजल्ट ब्राइट कैरियर स्कूल के सैकेट्री जर्रार अहमद नकवी को देने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आवार्ड से सम्मनित किया था।

सैयद जर्रार अहमद नकवी ने एम.ए. बी.एड. डिप्लोमा इन जर्नलिज्म भी किया है। तथा वर्तमान में जर्रार अहमद मायनोरिटी इंस्टीटूशनल वेलफेयर सोसायटी के स्टेट सेक्रेटरी और नकवी वेलफयर सोसायटी के कोषाध्यक्ष व मोहल्ला विकास समिति में सेक्रेटरी है। इसके अलावा भी अनेक संस्थाओं से जुड़कर समाज सेवा कर रहे है।

ब्राइट कैरियर स्कूल में निरंतर एक्टिविटी चलती रहती है। इसके आलावा स्कूल में बच्चों को दीनीयात अरबी की तालीम भी दी जाती है। जर्रार अहमद की अहलिया तरन्नुम नकवी भी इस नेक कार्य में उनसे पीछे नही है। अपने पति के साथ कांधे से कांधा मिला कर विद्यालय में बच्चों को शिक्षा दे रही है। और यही उम्मीद उन्हे अपनी बेटी आफिया फातिमा से है जो की अभी डेढ़ वर्ष की है। बड़ी होकर व भी खिदमतें खल्क करेंगी।

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